बुधवार, 31 अगस्त 2011

सभी आजाद हैं, सिर्फ असली आजादी को छोड़ कर

सभी आजाद हैं, सिर्फ असली आजादी को छोड़ कर ................यह आजाद सोच वाले लोगों का देश है ! यहाँ ना किसी की जुबान पर ताला है, और ना ही किसी की हरकतों की कोई चाबी है, आखिर इन चौसठ सालों में हम भारतीय लोगों ने यही तो कमाया है, आज पूरी आजादी है दोस्त ! जो मन में आए बोलते रहो जो दिल करता है वही कर डालो ! मजहब के नाम पर ,राजनीति के नाम पर मनोरंजन के नाम पर हास्य शो के नाम पर, कुंठित विकास के वास्ते तुम उन्मुक्त भाव से कुछ भी कर डालो !
आज राखी सावंत मेरिज व्यूरो बना लो , मल्लिका शेरावत ओपन यूनिवर्सिटी खोल लो, इमरान हाशमी किसिंग इंस्टीच्यूट शुरू कर लो, और तो और लगे हाथों किसी दबंग राजनेता से उदघाटन भी करवा लो फिर देखो तुम्हारा हर गुनाह माफ  है !
चहुँ और खुला बाजार, खुली इकोनोमी, खुला शरीर ऐसा खुलापन पहले कभी नहीं देखा गया इस राष्ट्र की धरती पर आज इस आधुनिकता ने हमारे तन व् दिमाग से सब कुछ उतार दिया है, और हम ओपन माईंडेड हो गए हैं, खुले आम निकलो खुली बहस करो, खुले दिमाग से चिंतन करो, इस आजादी की जय बोलो, और जो इस आजादी का विरोध करे उसकी खोपड़ी खोल दो !
आजादी फडफडा रही है जियो प्यारे भाई , क्या डेमोक्रेसी आई है, प्यार की भी, इजहार की भी इसीलिए तो हम पापुलेशन के मामले में कब के सौ करोड के पार निकल गए हैं ! स्वतंत्र हैं हम, हमारे नन्हे मुन्हे सी डी के माध्यम से इंटरनेट के माध्यम से अदर्शनीय छवियाँ देखने सुनने और व्यंजनों की प्लेट में जंक फ़ूड खाने पीने को आजाद हैं, नित नए नए फैशन और प्रसादन में स्वतंत्र हैं !
इतना ही नहीं इस मुल्क में तमाम बीमारियाँ और महामारियां भी आजाद हैं, कि वे हम पर खुले आम हमले करती हैं ! कभी स्वाईन फ़्लू, तो कभी चाईनीज फीवर, कभी एड्स तो कभी डेंगू ,सभी अपना थूथन उठाए हमारी इस मुक्त धरा को पवित्र बनाने को रिश्वत लेती हैं !
हमारे इस तथाकथित आजाद भारत में पल्स पोलियो अभियान का लगातार चलते रहना इस बात का पक्का सबूत है कि हम अपने बच्चों को दो बूँद जिंदगी की ना पिलाने के लिए किस हद तक धृड संकल्पित हैं, जागरूक और आजाद हैं ! यहाँ कीमतें आजाद हैं की दाल और चीनी के भाव इतने बढ़ जाएँ कि इनका इस्तेमाल भी भोजन में दालचीनी जितना ही होने लग पड़े !
चारों और आजादी ही आजादी है, आतंकवादी और अपराधी आजाद हैं कि निर्दोष जीवों का शिकार करते रहें ! पुनस्तव आजाद है कि बलात्कार करें ! पंचयतें आजाद हैं कि पीड़ित को ही प्रताडित करती रहें ! और तो और इस मुल्क की आम पब्लिक भी आजाद है कि वह पानी, बिजली, गैस, तेल के लिए पर्दर्शन और धरना करती रहे ! पर एक बात बड़ी प्यारी कि उधर प्रशासन और पुलिस भी आजाद है उन पर लाठी – गोलियाँ बरसाने के लिए, किसान आजाद है आत्महत्या करने के लिए और लीडर नेता आजाद हैं भर्ष्टाचार करने के लिए !  
अंत  में मैं यही कहना चाहूँगा की जिस आजादी को लेकर हम सब भ्रम में हैं वो भ्रम हमारा अभी तक टूटा नहीं है और जिस दिन ये भ्रम टूटेगा तभी सच्ची आजादी की नीवं रखी जाएगी ! अब फैसला आपका है कि नीवं राखी जाए या फिर उसी भ्रम में जिया जाए !

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर लेख लिखा है संजय जी आप ने , इस कथित स्वतंत्रता को दर्पण दिखा दिया है अब आप ने

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  2. सही कहा है आपने .....हमें खुद ही फैसला करना होगा

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  3. bilkul sahi kaha aapne......hame neev rakhni h lekin kushal netritav ke sath

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  4. एक दम तार्किक पोस्ट है आपकी .......धन्यवाद

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