सोमवार, 4 जुलाई 2011

सुव्यवस्था सूत्रधार मंच नियमावली

मित्रों आप सभी की सहायता से हमने सुव्यवस्था सूत्रधार के माध्यम सेएक छोटा सा प्रयास किया है समाज में गौण होते मुद्दों और विभिन्न मुद्दों पर हमारे समाज में फैली हुए भ्रांतियों को दूर करने का..

ये किसी ब्यक्ति विशेष का मंच नहीं है ..हर कोई जो भी समाज के किसी भी मुद्दे 
पर एक तार्किक दृष्टी  रखता है उसकी रचनाओं विचारो का स्वागत है...

हमें लगता है की ब्लॉग जगत अब इतना परिपक्व हो चुका है, की हमें अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को समझते हुए विषय आधारित चर्चा करनी चाहिए और समस्याओं के समाधान की दिशा में चर्चा करते हुए समस्याओं के किसी समाधान तक पहुचना चाहिए... उस समाधान की सहायता से समस्या को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए |इस मंच से हमने एक प्रयास किया है इतिहास के गर्त में जा चुके पहलूओं से ले कर समसामयिक तार्किक मुद्दों पर विचार करने एवं तटस्थ एवं सत्य विचारधाराओं का अन्वेषण करने में..

हम सभी की सुविधा के लिए मंच के कुछ नियम निर्धारित किये जा रहें है जिनमे यदि आवश्यक हुआ तो आप के सुझवों एवं समयानुसार परिवर्तन किया जा सकता है..
इस मंच पर १दिन (२४ घंटे) में १ ही लेख प्रकशित होगा जिससे की लेख एवं उसके विचार ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँच सके.
इस मंच पर केवल इस मंच के विषय पर आधारित लेख ही डालें |
 लेखकों से अनुरोध है की धार्मिक मुद्दों पर लेख लिखते समय तथ्यात्मक रहें और अनुचित उन्मादी प्रत्यारोपो से यथासंभव बचें..
 किसी भी लेखक को ७ दिन में सिर्फ १ लेख प्रकाशित करने की अनुमति होगी.
 लेख को पोस्ट करते समय कृपया वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ जाँच ले..
 कोई भी पोस्ट लिखते समय उसमें सम्बंधित लेबल जरुर लिखें ..इससे विषय चयन में आसानी होती है..
व्यक्तिगत हो कर आरोप न लगायें तथा अमर्यादित भाषा के उपयोग से बचें..मंच पर अपनी व्यक्तिगत विचारधारा न थोप कर तर्कों एवं तथ्यों के माध्यम से अभिव्यक्ति करें..

 आप अपनी पोस्ट ड्राफ्ट में सहेज दें ..संपादक उसे जरुरी संपादन के बाद,बिना विषय वस्तु से छेड़छाड किये बिना  पोस्ट कर देंगे..कृपया ध्यान दे संपादक का निर्णय अंतिम होगा..(दिनांक १०-७-११ को जोड़ा गया)
 कृपया अनावश्यक लिंक न दे..आप अपने इस मंच पर अपने विचार साझा करने के लिए हैं न की लिंक.(दिनांक १०-७-११ को जोड़ा गया).

इश्वर से कामना है की इस मंच को तार्किक वास्तविक सामाजिक सरोकारों के मंच के रूप में स्थापित कर सकेंगे ...आप सभी को संचालक मडल एवं तकनिकी प्रबंधको का चयन नाम एवं प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में मंच पर सार्वजनिक कर दी जाएगी..यदि आप कोई योगदान देना चाहते हो तो कृपयाहमें;suvyawastha@gmail.com पते पर ईमेल करें ..

किसीभी व्यवस्था में रूढ़ता आने से उस व्यवस्था में बुराइयाँ आनी प्रारंभ हो जाती हैं , जिस प्रकार रुके हुए पानी में सडन पैदा हो जाती है परन्तु प्रवाहित जल में सडन नहीं पैदा होती है उसी तरह व्यवस्थाएं भी प्रवाहमान सतत परिवर्तनशील होनी चाहिए इसी लिए हमने इस मंच की व्यवस्थाओं को प्रवाहमान,सतत परिवर्तनीय और शुभ परिवर्तनों के लिए सदैव तैयार रखा है,;
सतत परिवर्तनीयऔर शुभ परिवर्तनों के लिए सदैव तैयार रखा है, हमारे ये नियम "इति" नहीं हैं हम भी महान परम्पराओं की तहां इस नियमों के अंत में कहना चाहेंगे "नेति नेति....

"मंचकी तरफ से
 

सहयोगाकांक्षी


सुव्यवस्था सूत्रधार

6 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर विचार, एक स्वच्छ मकसद के साथ सार्थक कार्य का शुभारम्भ. नियम दुरुस्त हैं. हो सके तो हमें भी शामिल करे. editor.bhadohinews@gamail.com

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  2. पुलिस के साथ मुसलमानों का रवैया कैसा होना चाहिए ?
    पुलिस का काम शांति व्यवस्था बनाए रखना है और इसके लिए उसे क़ानून तोड़ने वालों को पकड़ना भी पड़ता है और उन्हें पकड़ने के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ता है । कई बार हालात पुलिस के ख़िलाफ़ हो जाते हैं । ऐसा तब होता है जबकि कम अनुभवी या जल्दबाज़ लोग ऐसी मुहिम में शामिल हों । कुछ जोशीले युवक कुछ कर दिखाने के चक्कर में ऐसा कुछ कर जाते हैं जिसके अंजाम का ख़ुद उन्हें भी कोई अंदाज़ा नहीं होता । भारतीय पुलिस सभी धर्म स्थलों का आदर करती है और उनकी सुरक्षा भी करती है । जब कभी इनमें विशेष आयोजन के चलते ज़्यादा भीड़ भाड़ होती है तो पुलिस ही वहाँ शाँति व्यवस्था बनाती है । रमज़ान , ईद , बक़रीद , मुहर्रम और बारावफ़ात से लेकर मज़ारों पर आए दिन लगने वाले मेलों में पुलिस के जवान अपना आराम सुकून खोकर अपनी ड्यूटी अंजाम देते हैं । ये बात भी ज़माना जानता है ।
    इसके बावजूद भी आए दिन पुलिस पब्लिक संघर्ष की ख़बरें आती रहती हैं । कभी इस वर्ग के साथ तो कभी उस वर्ग के साथ , कभी इस शहर से तो कभी उस शहर से। फिलहाल मुरादाबाद से ख़बर आई है और इस बार मुसलमान पुलिस से भिड़ गए । मुसलमानों को ग़ुस्सा आ गया जब एक दबिश के दौरान पुलिस ने मुल्ज़िमान के घर का सामान बाहर फ़ेंका तो उसमें उन्होंने क़ुरआन भी फेंक दिया । ऐसा अनजाने में हुआ होगा , पुलिस के बारे में अपने अनुभव की बुनियाद पर मैं दावे से कह सकता हूँ । भूलवश हुई ग़लतियों पर तो ख़ुदा भी नहीं पकड़ता तब बंदों को एक्शन लेने की क्या ज़रूरत आ गई थी । अगर उन्हें नाराज़गी भी थी तो वे अपने चुने हुए एमएलए और एमपी से कहते , अपने डीएम और एसएसपी से कहते । इस्लाम और क़ुरआन तो यह कहता है । क़ुरआन फ़साद से रोकता है और मुरादाबाद में मुसलमानों ने क़ुरआन के नाम पर ही फ़साद खड़ा कर दिया । उन्होंने दरोग़ा को घायल कर दिया और फिर दोनों आपस में भिड़ गए । अब आग लगी देखकर आज़म ख़ाँ जैसे भी दौड़ लिए मुरादाबाद की तरफ़ । ये हरगिज़ नहीं बताएंगे कि ऐ मुसलमानो , तुमने यहाँ ग़लती की । ये तो भड़कती आग को और भी ज़्यादा भड़काएंगे ।
    ऐसा केवल इसलिए हुआ क्योंकि मुसलमान भावना में बह कर वह कर रहा है जो उसके मन में आ रहा है , जबकि उसे वह करना चाहिए जो कुरआन बता रहा है । कुरआन के हुक्म को न मानना भी कुरआन का अपमान है और यह अपमान मुसलमानों की हर बस्ती में खुलेआम हो रहा है और रोजाना हो रहा है । अगर मुसलमानों की बस्ती में कुरआन की बात मानी जा रही होती तो वहाँ कोई ऐसा आदमी न होता जिसे पकड़ने के लिए पुलिस आती और अगर कोई इक्का दुक्का ऐसा आदमी होता भी तो मुसलमान उसे पकड़कर खुद पुलिस को दे देते।
    पुलिस के साथ मामला करते हुए मुसलमानों को जज़्बात में बहने के बजाय क़ुरआन की हिदायत पर चलना चाहिए ताकि शाँति व्यवस्था बनी रहे।

    बेहुरमती सहीफ़ों की इक ज़ुल्म है 'असद'
    इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ज़रूरी है अहतजाज
    लेकिन ये अहतजाज तशददुद से पाक हो
    ताकि न मुन्तशिर हो मुहब्बत भरा समाज

    बे-हुरमती-अपमान , सहीफ़ा- धर्मग्रंथ जिसमें ईशवाणी हो , अहतजाज-विरोध , तशददुद-हिंसा , मुन्तशिर-विखंडन का शिकार
    -------------------
    आपने लिखा है कि
    ये किसी ब्यक्ति विशेष का मंच नहीं है ..हर कोई जो भी समाज के किसी भी मुद्दे पर एक तार्किक दृष्टी रखता है उसकी रचनाओं विचारो का स्वागत है...
    अत: आपके मंच को सहयोग स्वरुप हम अपना यह लेख प्रदान करते हैं .
    किसी को सदस्य बनाया जाना प्रतिबंधित न हो तो हमें भी सदस्य बनायें और अपने दावों की सत्यता प्रमाणित करें .
    धन्यवाद
    eshvani@gmail.com

    http://www.sahityapremisangh.com/2011/07/blog-post_7116.html

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  3. जैसा की पहले कहा गया है की सुव्यवस्था सूत्रधार मंच किसी विचारधार का प्रतिनिधित्व नहीं करता है...
    प्रतिबन्ध का कोई सवाल ही नहीं है..आप बेझिझक अपनी बात इस मंच के माध्यम से नियमों की परिधि में लिख सकते हैं...
    सहयोग के इए आभार आप को आमंत्रण भेज दिया गया है..

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  4. बीना शर्मा9 जुलाई 2011 को 6:36 pm

    बहुत अच्छा प्रयास है आपका |प्राथमिक शिक्षा से जुड़े कुछ सवाल मेरे पास भी है यदि आप उन्हें प्रकाशित करते हों तो मैं अवश्य भेजूंगी|

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  5. वीना शर्मा जी..
    मंच पर आने के लिए बहुत बहुत आभार,.
    आप अपने विचार suvyawastha@gmail.comपर भेज सकती हैं...
    आप के प्रश्नों पर आधारित लेख प्रस्तुत किया जायेगा....

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